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इत्येतदन्नदानस्य तिलदानस्य चैव ह।
भूमिदानस्य च फलं गोदानस्य च कीर्तितम्॥ ६५॥
अनुवाद
इस प्रकार मैंने अन्न, तिल, भूमि और गौ दान के लाभ बताये हैं।
In this way I have described the benefits of donating food, sesame, land and cow.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि षट्षष्टितमोऽध्याय:॥ ६६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६६॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६५ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥