श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  13.68.59 
अन्नं वै प्रथमं द्रव्यमन्नं श्रीश्च परा मता।
अन्नात् प्राण: प्रभवति तेजो वीर्यं बलं तथा॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
अन्न प्रथम पदार्थ है। इसे श्रेष्ठ देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। अन्न ही जीवन, ऊर्जा, बल और शक्ति का स्रोत है ॥59॥
 
Food is the first substance. It is considered to be the form of the best goddess Lakshmi. Food is the source of life, energy, strength and power. ॥ 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)