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mahabharat 13.68.53: जो गाय दुबली हो, जिसका बछड़ा मर गया हो, जो लंगड़ी हो, रोगी हो, जिसके शरीर का कोई अंग नष्ट हो गया हो और जो थकी हुई (बूढ़ी) हो, उसे ब्राह्मण को नहीं देना चाहिए ॥53॥   |   mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  13.68.53 
न कृशां नापवत्सां वा वन्ध्यां रोगान्वितां तथा।
न व्यंगां न परिश्रान्तां दद्याद् गां ब्राह्मणाय वै॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जो गाय दुबली हो, जिसका बछड़ा मर गया हो, जो लंगड़ी हो, रोगी हो, जिसके शरीर का कोई अंग नष्ट हो गया हो और जो थकी हुई (बूढ़ी) हो, उसे ब्राह्मण को नहीं देना चाहिए ॥53॥
 
A cow which is thin, whose calf has died, which is lame, sick, lacking in some body part and is tired (old) should not be given to a Brahmin. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)