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mahabharat 13.68.48: बैल स्वर्ग का स्वरूप है। जो मनुष्य गौओं और बैलों के पति को पुण्यात्मा ब्राह्मण को दान करता है, वह स्वर्ग में सम्मानित होता है ॥48॥   |   mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  13.68.48 
स्वर्गो वै मूर्तिमानेष वृषभं यो गवां पतिम्।
विप्रे गुणयुते दद्यात् स वै स्वर्गे महीयते॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
बैल स्वर्ग का स्वरूप है। जो मनुष्य गौओं और बैलों के पति को पुण्यात्मा ब्राह्मण को दान करता है, वह स्वर्ग में सम्मानित होता है ॥48॥
 
The bull is the embodiment of heaven. One who donates the husband of cows and bulls to a virtuous Brahmin is honored in heaven. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)