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mahabharat 13.68.45: जो एक हजार गौएँ दान करता है, वह मरने के बाद नरक में नहीं जाता। हे मनुष्यों के स्वामी! वह सर्वत्र विजय प्राप्त करता है॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.68.45 
गवां सहस्रद: प्रेत्य नरकं न प्रपद्यते।
सर्वत्र विजयं चापि लभते मनुजाधिप॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
जो एक हजार गौएँ दान करता है, वह मरने के बाद नरक में नहीं जाता। हे मनुष्यों के स्वामी! वह सर्वत्र विजय प्राप्त करता है॥ 45॥
 
He who donates a thousand cows does not go to hell after death. O Lord of men! He achieves victory everywhere. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)