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mahabharat 13.68.44: हे राजन! हे पृथ्वीनाथ! जो मनुष्य इन गौओं को श्रेष्ठ ब्राह्मणों को दान करता है, वह संकटग्रस्त होने पर भी उस महान विपत्ति से मुक्ति पा लेता है॥44॥   |   mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  13.68.44 
ता इमा बिप्रमुख्येभ्यो यो ददाति महीपते।
निस्तरेदापदं कृच्छ्रां विषमस्थोऽपि पार्थिव॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! हे पृथ्वीनाथ! जो मनुष्य इन गौओं को श्रेष्ठ ब्राह्मणों को दान करता है, वह संकटग्रस्त होने पर भी उस महान विपत्ति से मुक्ति पा लेता है॥44॥
 
O King! O Prithvinath! One who donates these cows to the noble brahmins, even if he is in trouble, gets salvation from that great calamity. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)