श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  13.68.30-31h 
तथा गवार्थे शरणं शीतवर्षसहं दृढम्॥ ३०॥
आसप्तमं तारयति कुलं भरतसत्तम।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जो मनुष्य गौओं के लिए शीत और वर्षा से रक्षा करने वाला सुदृढ़ आश्रय बनाता है, वह अपनी सात पीढ़ियों का उद्धार करता है।
 
O best of the Bharatas! He who builds a strong shelter for the cows that protects them from cold and rain, saves his seven generations. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)