Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.68.29-30h: जो ब्राह्मण गुरुकुल में उत्पन्न होकर अपनी इन्द्रियों को वश में करके सूर्य की बात सुनता है, वह किसी के दिए हुए घर में सुखपूर्वक रहता है, वह उत्तम लोकों को प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  13.68.29-30h 
अध्यापककुले जात: श्रोत्रियो नियतेन्द्रिय:॥ २९॥
गृहे यस्य वसेत् तुष्ट: प्रधानं लोकमश्नुते।
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण गुरुकुल में उत्पन्न होकर अपनी इन्द्रियों को वश में करके सूर्य की बात सुनता है, वह किसी के दिए हुए घर में सुखपूर्वक रहता है, वह उत्तम लोकों को प्राप्त करता है।
 
A Brahmin born in a family of teachers and having controlled his senses and listening to the Sun, lives happily in a house given by someone, attains the best of the worlds. 29 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)