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mahabharat 13.68.1: युधिष्ठिर ने पूछा, "कृपया मुझे यह बताइए कि जो ब्राह्मण को गर्मी में जलते हुए पैर के जूते पहनाता है, उसे क्या फल मिलता है?"   |   mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.68.1 
युधिष्ठिर उवाच
दह्यमानाय विप्राय य: प्रयच्छत्युपानहौ।
यत् फलं तस्य भवति तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "कृपया मुझे यह बताइए कि जो ब्राह्मण को गर्मी में जलते हुए पैर के जूते पहनाता है, उसे क्या फल मिलता है?"
 
Yudhishthira asked, "Please tell me the reward of one who makes a Brahmin wear shoes whose feet are burning in the summer."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)