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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 67: सुवर्ण और जल आदि विभिन्न वस्तुओंके दानकी महिमा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.67.5 
सर्वं तारयते वंशं यस्य खाते जलाशये।
गाव: पिबन्ति विप्राश्च साधवश्च नरा: सदा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जिसका तालाब खोदा गया है और जिसमें से गौएँ, ब्राह्मण और श्रेष्ठ पुरुष सदैव जल पीते हैं, वह तालाब उस मनुष्य के सम्पूर्ण वंश को मुक्ति प्रदान करता है ॥5॥
 
The one whose pond is dug and from which cows, Brahmins and noble men always drink water, that pond liberates the entire lineage of that person. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)