Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.67.14-15: राजेन्द्र! जो पुरुष सदाचारी ब्राह्मणों को भोजन पकाने और गर्म करने के लिए लकड़ी देता है, उसकी सभी इच्छाएँ और नाना प्रकार के कार्य सदैव पूर्ण होते हैं और वह अपने शत्रुओं से ऊपर रहता है तथा अपने तेजस्वी शरीर से प्रकाशित होता है ॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 13.67: सुवर्ण और जल आदि विभिन्न वस्तुओंके दानकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
य: साधनार्थं काष्ठानि ब्राह्मणेभ्य: प्रयच्छति।
प्रतापनार्थं राजेन्द्र वृत्तवद्भॺ: सदा नर:॥ १४॥
सिद्धॺन्त्यर्था: सदा तस्य कार्याणि विविधानि च।
उपर्युपरि शत्रूणां वपुषा दीप्यते च स:॥ १५॥
अनुवाद
राजेन्द्र! जो पुरुष सदाचारी ब्राह्मणों को भोजन पकाने और गर्म करने के लिए लकड़ी देता है, उसकी सभी इच्छाएँ और नाना प्रकार के कार्य सदैव पूर्ण होते हैं और वह अपने शत्रुओं से ऊपर रहता है तथा अपने तेजस्वी शरीर से प्रकाशित होता है ॥14-15॥
Rajendra! The man who always supplies wood to virtuous Brahmins for cooking and heating food, all his desires and various kinds of works always get fulfilled and he remains above his enemies and shines with his radiant body. ॥ 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥