Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.66.36: भीष्मजी कहते हैं - राजन! इस प्रकार नक्षत्रों के संयोग में किए जाने वाले विविध दानों का यहाँ संक्षेप में वर्णन किया गया है। नारदजी ने यह विषय देवकी को सुनाया था और देवकीजी ने अपनी बहुओं को सुनाया था। | mahabharat अध्याय 13.66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्मजी कहते हैं - राजन! इस प्रकार नक्षत्रों के संयोग में किए जाने वाले विविध दानों का यहाँ संक्षेप में वर्णन किया गया है। नारदजी ने यह विषय देवकी को सुनाया था और देवकीजी ने अपनी बहुओं को सुनाया था।
Bhishmaji says - King! In this way, the donation of various things done during the conjunction of stars has been described here in brief. Naradaji had narrated this topic to Devaki and Devakiji had narrated it to her daughters-in-law.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि नक्षत्रयोगदानं नाम चतु:षष्टितमोऽध्याय:॥ ६४॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें नक्षत्रयोग सम्बन्धी दान नामक चौंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ६४ ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥