श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.66.33 
कांस्योपदोहनां धेनुं रेवत्यां य: प्रयच्छति।
सा प्रेत्य कामानादाय दातारमुपतिष्ठति॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य रेवती नक्षत्र में पीतल के बने दूध के बर्तन सहित गौ का दान करता है, वह गौ परलोक में समस्त भोगों सहित दाता के समक्ष आती है ॥ 33॥
 
One who donates a cow with a milk pot made of brass in the Revati nakshatra, that cow appears before the donor in the next world with all the enjoyments. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)