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mahabharat 13.66.30: जो मनुष्य शतभिषा नक्षत्र के संयोग में अगुरु और चंदन सहित सुगंधित द्रव्यों का दान करता है, उसे परलोक में अप्सराओं का संग और अक्षय सुगंधि प्राप्त होती है ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 13.66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.66.30 
गन्धान् शतभिषायोगे दत्त्वा सागुरुचन्दनान्।
प्राप्नोत्यप्सरसां संघान् प्रेत्य गन्धांश्च शाश्वतान्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य शतभिषा नक्षत्र के संयोग में अगुरु और चंदन सहित सुगंधित द्रव्यों का दान करता है, उसे परलोक में अप्सराओं का संग और अक्षय सुगंधि प्राप्त होती है ॥30॥
 
One who donates aromatic substances including Aguru and sandalwood in the conjunction of Shatabhisha Nakshatra, gets the company of Apsaras and inexhaustible fragrance in the next world. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)