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mahabharat 13.66.29: जो व्यक्ति धनिष्ठा नक्षत्र में पूर्ण एकाग्रता के साथ बैलगाड़ी, वस्त्रों की पोटली और धन का दान करता है, वह मृत्यु के तुरंत बाद राजपद प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.66.29 
गोप्रयुक्तं धनिष्ठासु यानं दत्त्वा समाहित:।
वस्त्रराशिधनं सद्य: प्रेत्य राज्यं प्रपद्यते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति धनिष्ठा नक्षत्र में पूर्ण एकाग्रता के साथ बैलगाड़ी, वस्त्रों की पोटली और धन का दान करता है, वह मृत्यु के तुरंत बाद राजपद प्राप्त करता है।
 
He who, with full concentration during the Dhanishta Nakshatra, donates a bullock cart, a bundle of clothes and money, attains kingship soon after his death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)