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mahabharat 13.66.25-26h: जो व्यक्ति पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में व्रत रखता है और उत्तम कुल, सदाचारी तथा वेदों में पारंगत ब्राह्मण को दही से भरा पात्र दान करता है, वह मृत्यु के बाद ऐसे कुल में जन्म लेता है, जहाँ बहुत से पशु होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  13.66.25-26h 
अथ पूर्वास्वषाढासु दधिपात्राण्युपोषित:।
कुलवृत्तोपसम्पन्ने ब्राह्मणे वेदपारगे॥ २५॥
पुरुषो जायते प्रेत्य कुले सुबहुगोधने।
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में व्रत रखता है और उत्तम कुल, सदाचारी तथा वेदों में पारंगत ब्राह्मण को दही से भरा पात्र दान करता है, वह मृत्यु के बाद ऐसे कुल में जन्म लेता है, जहाँ बहुत से पशु होते हैं।
 
A person who fasts during the Purvashada Nakshatra and donates a vessel filled with curd to a Brahmin of noble family, virtuous conduct and well versed in the Vedas, is born after death in a family where there are plenty of cattle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)