श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.66.2 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
देवक्याश्चैव संवादं महर्षेर्नारदस्य च॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - युधिष्ठिर! इस विषय के जानकार लोग देवी देवकी और महर्षि नारद के मध्य हुए वार्तालाप के प्राचीन इतिहास का उदाहरण देते हैं।
 
Bhishma said - Yudhishthira! People knowledgeable about this topic give the example of the ancient history of the conversation between Goddess Devaki and Maharishi Narada.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)