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mahabharat 13.66.17: हे भारत! जो लोग चित्रा नक्षत्र में बैल और पवित्र गंध का अर्पण करते हैं, वे अप्सराओं के लोक में विचरण करते हैं और नंदन वन में आनंदित होते हैं॥17॥   |   mahabharat अध्याय 13.66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.66.17 
चित्रायां वृषभं दत्त्वा पुण्यगन्धांश्च भारत।
चरन्त्यप्सरसां लोके रमन्ते नन्दने तथा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! जो लोग चित्रा नक्षत्र में बैल और पवित्र गंध का अर्पण करते हैं, वे अप्सराओं के लोक में विचरण करते हैं और नंदन वन में आनंदित होते हैं॥17॥
 
O Bharata! Those who offer bull and holy perfume in the constellation Chitra, roam in the world of Apsaras and enjoy in Nandan forest.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)