श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  13.64.91 
भूमिदानस्य पुण्यानि फलं स्वर्ग: पुरंदर।
हिरण्यपुष्पाश्चौषध्य: कुशकाञ्चनशाद्वला:॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
पुरन्दर! भूमिदान के पुण्य के फलस्वरूप स्वर्ग, स्वर्ण पुष्प देने वाली औषधियाँ तथा स्वर्ण पुष्पों और घासों से आच्छादित भूमि प्राप्त होती है ॥91॥
 
Purandar! As a result of the virtues of donating land, one gets heaven, medicines giving golden flowers and land covered with golden flowers and grass. 91॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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