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mahabharat 13.64.86: देवेन्द्र! दिव्य मालाओं से विभूषित होकर नृत्य और गायन में तत्पर देवियाँ भूमिदाता की सेवा में स्वर्ग में उपस्थित हैं॥86॥   |   mahabharat अध्याय 13.64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.64.86 
नृत्यगीतपरा नार्यो दिव्यमाल्यविभूषिता:।
उपतिष्ठन्ति देवेन्द्र तथा भूमिप्रदं दिवि॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
देवेन्द्र! दिव्य मालाओं से विभूषित होकर नृत्य और गायन में तत्पर देवियाँ भूमिदाता की सेवा में स्वर्ग में उपस्थित हैं॥86॥
 
Devendra! Adorned with divine garlands, the goddesses engaged in dancing and singing are present in heaven in the service of the land giver. 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)