Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.64.8-9h: धर्म शास्त्रों का सिद्धांत है कि जैसा दान किया जाता है, वैसा ही भोग प्राप्त होता है। युद्ध में शरीर का त्याग करना और इस पृथ्वी का दान करना - ये दोनों कार्य क्षत्रियों को उत्तम धन की प्राप्ति कराने वाले हैं। | mahabharat अध्याय 13.64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा दानं तथा भोग इति धर्मेषु निश्चय:।
संग्रामे वा तनुं जह्याद् दद्याच्च पृथिवीमिमाम्॥ ८॥
इत्येतत् क्षत्रबन्धूनां वदन्ति परमां श्रियम्।
अनुवाद
धर्म शास्त्रों का सिद्धांत है कि जैसा दान किया जाता है, वैसा ही भोग प्राप्त होता है। युद्ध में शरीर का त्याग करना और इस पृथ्वी का दान करना - ये दोनों कार्य क्षत्रियों को उत्तम धन की प्राप्ति कराने वाले हैं।
The principle of religious scriptures is that whatever donation is made, the same enjoyment is received. Sacrificing one's body in a war and donating this earth - both these acts help the kshatriyas to obtain the best wealth. 8 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥