श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  13.64.72 
ओषधीर्वीर्यसम्पन्ना नगान् पुष्पफलान्वितान्।
काननोपलशैलांश्च ददाति वसुधां ददत्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी का दान करते समय मनुष्य शक्तिशाली औषधियों, फल-फूलों से भरे वृक्षों, वनों, शिलाओं और पर्वतों का भी दान करता है। 72.
 
While donating the earth, a man also donates powerful medicines, trees full of fruits and flowers, forests, rocks and mountains. 72.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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