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mahabharat 13.64.62: इन्द्र! जो मनुष्य समस्त सुखों सहित पृथ्वी का दान करता है, उसे सभी प्राणी समझते हैं कि वह मुझे दान कर रहा है ॥62॥   |   mahabharat अध्याय 13.64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.64.62 
सर्वकामसमायुक्तां काश्यपीं य: प्रयच्छति।
सर्वभूतानि मन्यन्ते मां ददातीति वासव॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र! जो मनुष्य समस्त सुखों सहित पृथ्वी का दान करता है, उसे सभी प्राणी समझते हैं कि वह मुझे दान कर रहा है ॥62॥
 
Indra! Whoever donates the earth with all its pleasures, all beings think that he is donating me. ॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)