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mahabharat 13.64.61: राजन! जो मनुष्य पृथ्वी का दान करता है, वह धन से सम्पन्न और समस्त मनोवांछित गुणों से युक्त होकर अगले जन्म में राजा बनता है; क्योंकि वही सर्वोत्तम दान है॥61॥   |   mahabharat अध्याय 13.64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.64.61 
महीं स्फीतां ददद् राजन् सर्वकामगुणान्विताम्।
राजाधिराजो भवति तद्धि दानमनुत्तमम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
राजन! जो मनुष्य पृथ्वी का दान करता है, वह धन से सम्पन्न और समस्त मनोवांछित गुणों से युक्त होकर अगले जन्म में राजा बनता है; क्योंकि वही सर्वोत्तम दान है॥61॥
 
Rajan! A man who donates the earth, rich in wealth and having all the desired qualities, becomes king in his next birth; Because that is the best donation. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)