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mahabharat 13.64.57: विबुद्धश्रेष्ठ! जो वीर पुरुष अपने हृदय में युद्ध के लिए उत्साह रखते हैं और युद्धस्थल में मारे जाने पर स्वर्ग को जाते हैं, वे भूमिदाता का उल्लंघन नहीं कर सकते।   |   mahabharat अध्याय 13.64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.64.57 
ये शूरा निहता युद्धे स्वर्याता रणगृद्धिन:।
सर्वे ते विबुधश्रेष्ठ नातिक्रामन्ति भूमिदम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
विबुद्धश्रेष्ठ! जो वीर पुरुष अपने हृदय में युद्ध के लिए उत्साह रखते हैं और युद्धस्थल में मारे जाने पर स्वर्ग को जाते हैं, वे भूमिदाता का उल्लंघन नहीं कर सकते।
 
Vibudhshrestha! Those brave men who have zeal for war in their hearts and go to heaven after being killed in the battlefield, cannot violate the land giver.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)