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mahabharat 13.64.56: हे प्रभु! देवेन्द्र! जैसा कि विद्वान पुरुष कहते हैं, मैं भूमिदान से बढ़कर किसी अन्य दान को नहीं मानता।   |   mahabharat अध्याय 13.64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  13.64.56 
न भूमिदानाद् देवेन्द्र परं किंचिदिति प्रभो।
विशिष्टमिति मन्यामि यथा प्राहुर्मनीषिण:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! देवेन्द्र! जैसा कि विद्वान पुरुष कहते हैं, मैं भूमिदान से बढ़कर किसी अन्य दान को नहीं मानता।
 
Lord! Devendra! As the wise men say, I do not consider any other donation to be greater than the donation of land. 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)