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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद
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श्लोक 5
श्लोक
13.64.5
अप्यल्पं प्रददु: सर्वे पृथिव्या इति न: श्रुतम्।
भूमिमेव ददु: सर्वे भूमिं ते भुञ्जते जना:॥ ५॥
अनुवाद
हमने सुना है कि जो लोग थोड़ी सी भी भूमि दान करते हैं, वे उस दान का पूरा फल प्राप्त करते हैं और उसका आनंद लेते हैं ॥5॥
We have heard that all those who have donated even a small piece of land, reap the full benefits of the donation and enjoy it. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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