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mahabharat 13.64.27: कालका द्वारा भेजी हुई मृत्यु, दण्ड, अज्ञान का अंधकार, भयंकर अग्नि और अत्यन्त भयंकर पाश - ये भूमिदान करने वाले को छू भी नहीं सकते ॥27॥   |   mahabharat अध्याय 13.64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.64.27 
मृत्युर्वैकिङ्करो दण्डस्तमो वह्नि: सुदारुण:।
घोराश्च दारुणा: पाशा नोपसर्पन्ति भूमिदम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कालका द्वारा भेजी हुई मृत्यु, दण्ड, अज्ञान का अंधकार, भयंकर अग्नि और अत्यन्त भयंकर पाश - ये भूमिदान करने वाले को छू भी नहीं सकते ॥27॥
 
Death sent by Kaalka, punishment, darkness of ignorance, terrible fire and the most terrible noose - these cannot touch the person who donates land. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)