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mahabharat 13.64.20: जो राजा कठोर कर्म करते हैं और पापी हैं, उन्हें पापों से मुक्ति पाने के लिए भूमिदान की परम पवित्र और उत्तम विधि का उपदेश करना चाहिए ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 13.64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.64.20 
येऽपि संकीर्णकर्माणो राजानो रौद्रकर्मिण:।
तेभ्य: पवित्रमाख्येयं भूमिदानमनुत्तमम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जो राजा कठोर कर्म करते हैं और पापी हैं, उन्हें पापों से मुक्ति पाने के लिए भूमिदान की परम पवित्र और उत्तम विधि का उपदेश करना चाहिए ॥20॥
 
Those kings who perform harsh deeds and are sinful should preach the most sacred and best way of donating land to free themselves from their sins. ॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)