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mahabharat 13.64.18: हे राजन! ब्राह्मण लोग तो महापुरुष द्वारा दी गई भूमि की सदैव प्रशंसा करते हैं, किन्तु राजा के शत्रु उस भूमि की कभी प्रशंसा नहीं करते।   |   mahabharat अध्याय 13.64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.64.18 
यस्य विप्रास्तु शंसन्ति साधोर्भूमिं सदैव हि।
न तस्य शत्रवो राजन् प्रशंसन्ति वसुन्धराम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! ब्राह्मण लोग तो महापुरुष द्वारा दी गई भूमि की सदैव प्रशंसा करते हैं, किन्तु राजा के शत्रु उस भूमि की कभी प्रशंसा नहीं करते।
 
O King! The Brahmins always praise the land given by a great man but the enemies of the king never praise that land. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)