Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.64.16: जो अन्य लोग भविष्य में भूमि प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें भी इसी जन्म में इसी प्रकार भूमि दान करना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं है। जो बल और छल से महापुरुष की भूमिका चुराता है, उसे भूमिका नहीं मिलती। 16॥ | mahabharat अध्याय 13.64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये चान्ये भूमिमिच्छेयु: कुर्युरेवं न संशय:।
य: साधोर्भूमिमादत्ते न भूमिं विन्दते तु स:॥ १६॥
अनुवाद
जो अन्य लोग भविष्य में भूमि प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें भी इसी जन्म में इसी प्रकार भूमि दान करना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं है। जो बल और छल से महापुरुष की भूमिका चुराता है, उसे भूमिका नहीं मिलती। 16॥
Others who wish to get land in the future life should also donate land in the same way in this life. There is no doubt in it. One who steals the role of a great man by force and deceit does not get the role. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥