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mahabharat 13.64.14: इसमें कोई संदेह नहीं कि वह राजा के रूप में पुनर्जन्म लेगा। इसलिए राजा को चाहिए कि भूमि पर अधिकार होते ही उसका कुछ भाग किसी ब्राह्मण को दान कर दे ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 13.64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.64.14 
पुनश्चासौ जनिं प्राप्य राजवत् स्यान्न संशय:।
तस्मात् प्राप्यैव पृथिवीं दद्याद् विप्राय पार्थिव:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि वह राजा के रूप में पुनर्जन्म लेगा। इसलिए राजा को चाहिए कि भूमि पर अधिकार होते ही उसका कुछ भाग किसी ब्राह्मण को दान कर दे ॥14॥
 
There is no doubt that he will be reborn as a king. Therefore, the king should donate some of the land to a Brahmin as soon as he gains control over it. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)