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mahabharat 13.61.6: हे पुरुषसिंह! तुम्हें उपर्युक्त पवित्र वस्तुओं का दान सदैव श्रेष्ठ पुरुषों को ही करना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं कि ये दान मनुष्य को पापों से मुक्त कर देते हैं ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 13.61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.61.6 
एतानि पुरुषव्याघ्र साधुभ्यो देहि नित्यदा।
दानानि हि नरं पापान्मोक्षयन्ति न संशय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषसिंह! तुम्हें उपर्युक्त पवित्र वस्तुओं का दान सदैव श्रेष्ठ पुरुषों को ही करना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं कि ये दान मनुष्य को पापों से मुक्त कर देते हैं ॥6॥
 
O Purushsingh! You should always donate the above-mentioned sacred things to noble men only. There is no doubt that these donations free a man from sins. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)