Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.61.35-36: सभी क्षत्रिय, चाहे वे छोटे हों या बड़े, तथा जो बड़े से बड़े हैं, वे भी जो अपने तेज और बल से तपस्या कर रहे हैं, उनका तेज और तपस्या ब्राह्मणों के पास जाते ही शांत हो जाती है ॥35-36॥ | mahabharat अध्याय 13.61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपरेषां परेषां च परेभ्यश्चापि ये परे॥ ३५॥
क्षत्रियाणां प्रतपतां तेजसा च बलेन च।
ब्राह्मणेष्वेव शाम्यन्ति तेजांसि च तपांसि च॥ ३६॥
अनुवाद
सभी क्षत्रिय, चाहे वे छोटे हों या बड़े, तथा जो बड़े से बड़े हैं, वे भी जो अपने तेज और बल से तपस्या कर रहे हैं, उनका तेज और तपस्या ब्राह्मणों के पास जाते ही शांत हो जाती है ॥35-36॥
All the Kshatriyas, whether small or big, and even those who are greater than the greatest, who are performing penance with their brilliance and strength, their brilliance and penance get pacified as soon as they go to the Brahmins. ॥ 35-36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥