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mahabharat 13.61.24: ऋत्विक, पुरोहित और आचार्य - ये प्रायः सौम्य स्वभाव वाले और वेदों के ज्ञाता होते हैं। ब्राह्मण के पास जाते ही क्षत्रिय का तेज क्षीण हो जाता है। 24॥   |   mahabharat अध्याय 13.61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.61.24 
ऋत्विक्पुरोहिताचार्या मृदुब्रह्मधरा हि ते।
क्षात्रेणापि हि संसृष्टं तेज: शाम्यति वै द्विजे॥ २४॥
 
 
अनुवाद
ऋत्विक, पुरोहित और आचार्य - ये प्रायः सौम्य स्वभाव वाले और वेदों के ज्ञाता होते हैं। ब्राह्मण के पास जाते ही क्षत्रिय का तेज क्षीण हो जाता है। 24॥
 
Ritvik, Priest and Acharya – These are usually of gentle nature and possess the Vedas. The brightness of a Kshatriya subsides as soon as he approaches a Brahmin. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)