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ऋत्विक्पुरोहिताचार्या मृदुब्रह्मधरा हि ते।
क्षात्रेणापि हि संसृष्टं तेज: शाम्यति वै द्विजे॥ २४॥
अनुवाद
ऋत्विक, पुरोहित और आचार्य - ये प्रायः सौम्य स्वभाव वाले और वेदों के ज्ञाता होते हैं। ब्राह्मण के पास जाते ही क्षत्रिय का तेज क्षीण हो जाता है। 24॥
Ritvik, Priest and Acharya – These are usually of gentle nature and possess the Vedas. The brightness of a Kshatriya subsides as soon as he approaches a Brahmin. 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥