Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.61.12: हे कुन्तीपुत्र! जो महापुरुष अपनी स्त्री और सन्तानों का भरण-पोषण न कर पाने के कारण बहुत दुःख उठाते हैं, परन्तु किसी से भीख नहीं मांगते और सदैव सत्कर्मों में लगे रहते हैं, उन्हें सब प्रकार से सहायता करने के लिए आमंत्रित करना चाहिए। ॥12॥ | mahabharat अध्याय 13.61: भीष्मद्वारा उत्तम दान तथा उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनके सत्कारका उपदेश । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे कुन्तीपुत्र! जो महापुरुष अपनी स्त्री और सन्तानों का भरण-पोषण न कर पाने के कारण बहुत दुःख उठाते हैं, परन्तु किसी से भीख नहीं मांगते और सदैव सत्कर्मों में लगे रहते हैं, उन्हें सब प्रकार से सहायता करने के लिए आमंत्रित करना चाहिए। ॥12॥
O son of Kunti! Those great men who suffer a lot due to their inability to maintain their wives and children, but do not beg from anyone and always remain engaged in good deeds, should be invited to help in every possible way. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥