श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.60.5 
अथवा मित्रसदनं मैत्रं मित्रविवर्धनम्।
कीर्तिसंजननं श्रेष्ठं तडागानां निवेशनम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अथवा तालाब बनवाना मित्र के घर बनाने के समान है, लाभदायक है, मित्रता का कारण है, मित्रों की संख्या बढ़ाता है और यश फैलाने का सर्वोत्तम साधन है ॥5॥
 
Or constructing ponds is like constructing a friend's house, is beneficial, is a cause of friendship, increases the number of friends and is the best means of spreading fame. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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