श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.60.27 
तस्य पुत्रा भवन्त्येते पादपा नात्र संशय:।
परलोकगत: स्वर्गं लोकांश्चाप्नोति सोऽव्ययान्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि ये वृक्ष लगाने वाले के लिए पुत्र के समान हैं। इनके कारण ही वह परलोक में जाकर स्वर्ग और अनन्त लोकों को प्राप्त करता है ॥27॥
 
There is no doubt that these trees are like sons to the one who plants them. It is because of them that he attains heaven and eternal worlds when he goes to the next world. ॥27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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