श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 60: जलाशय बनानेका तथा बगीचे लगानेका फल  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.60.12 
हेमन्तकाले सलिलं तडागे यस्य तिष्ठति।
स वै बहुसुवर्णस्य यज्ञस्य लभते फलम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जिसके तालाब में हेमंत (अगहन-पौष) मास तक जल रहता है, वह बहुत से स्वर्ण सहित महान यज्ञ के फल का भागी होता है।॥12॥
 
He in whose pond the water stays till the month of Hemant (Agahan - Paush) becomes a sharer of the fruits of a great yagna along with a lot of gold as dakshina.॥ 12॥
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