Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.6.9: कर्म करने वाले मनुष्य को अपने अच्छे-बुरे कर्मों का फल स्वयं ही भोगना पड़ता है। यह संसार में स्पष्ट दिखाई देता है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.6.9 
कर्मण: फलनिर्वृत्तिं स्वयमश्नाति कारक:।
प्रत्यक्षं दृश्यते लोके कृतस्यापकृतस्य च॥ ९॥
 
 
अनुवाद
कर्म करने वाले मनुष्य को अपने अच्छे-बुरे कर्मों का फल स्वयं ही भोगना पड़ता है। यह संसार में स्पष्ट दिखाई देता है॥9॥
 
A person who performs karma has to bear the consequences of his good or bad deeds himself. This is clearly visible in the world.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)