श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.6.7 
यथा बीजं विना क्षेत्रमुप्तं भवति निष्फलम्।
तथा पुरुषकारेण विना दैवं न सिध्यति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जैसे बीज बिना खेत में बोए फल नहीं दे सकता, वैसे ही बिना परिश्रम के भाग्य की प्राप्ति नहीं हो सकती ॥7॥
 
Just like a seed cannot bear fruit unless it is sown in the field, similarly destiny cannot be achieved without hard work. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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