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श्लोक 13.6.49  |
अभ्युत्थानेन दैवस्य समारब्धेन कर्मणा।
विधिना कर्मणा चैव स्वर्गमार्गमवाप्नुयात्॥ ४९॥ |
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| अनुवाद |
| मनुष्य भगवान् के उदय से लेकर शास्त्रानुसार उत्तम पुरुषार्थ और शुभ कर्मों के द्वारा ही स्वर्ग का मार्ग प्राप्त कर सकता है ॥49॥ |
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| Man can attain the path to heaven only through the best efforts and good deeds as per the scriptures, starting from the rise of God. 49॥ |
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इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि दैवपुरुषकारनिर्देशे षष्ठोऽध्याय:॥ ६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें दैव और पुरुषार्थका निर्देशविषयक छठा अध्याय पूरा हुआ ॥ ६ ॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ५१ श्लोक हैं) |
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