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श्लोक 13.6.48  |
एतत् ते सर्वमाख्यातं मया वै मुनिसत्तम।
फलं पुरुषकारस्य सदा संदृश्य तत्त्वत:॥ ४८॥ |
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| अनुवाद |
| मुनिश्रेष्ठ! मैंने अपने पुरुषार्थ का फल प्रत्यक्ष देखकर ही ये सब बातें आपसे यथार्थ रूप से कही हैं ॥48॥ |
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| Munishrestha! I have always told you all these things realistically after seeing the fruits of my efforts firsthand. 48॥ |
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