|
| |
| |
श्लोक 13.6.43  |
यथाग्नि: पवनोद्धूत: सुसूक्ष्मोऽपि महान् भवेत्।
तथा कर्मसमायुक्तं दैवं साधु विवर्धते॥ ४३॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| जैसे छोटी सी अग्नि वायु की सहायता से बहुत बड़ी हो जाती है, वैसे ही मनुष्य के प्रयत्न से ईश्वर की शक्ति बढ़ती है ॥ 43॥ |
| |
| Just as a small fire becomes very big with the help of air, similarly the power of God increases with the help of human effort. ॥ 43॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|