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श्लोक 13.6.41  |
तपोनियमसंयुक्ता मुनय: संशितव्रता:।
किं ते दैवबलात् शापमुत्सृजन्ते न कर्मणा॥ ४१॥ |
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| अनुवाद |
| क्या कठोर तप और अनुशासन का पालन करने वाले ऋषिगण अपने प्रयत्नों से नहीं, अपितु ईश्वर की शक्ति से किसी को शाप देते हैं? ॥41॥ |
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| Do the sages who follow a strict vow of austerity and discipline curse someone by the power of God and not by their efforts? ॥41॥ |
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