|
| |
| |
श्लोक 13.6.4  |
तत: पद्मोद्भवो राजन् देवदेव: पितामह:।
उवाच मधुरं वाक्यमर्थवद्धेतुभूषितम्॥ ४॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| राजन! तब कमलवत देवाधिदेव पितामह ने मधुर वाणी में युक्तिसंगत एवं अर्थपूर्ण वचन कहे-॥4॥ |
| |
| King! Then the lotus-born Devadhidev Pitamah said logical and meaningful words in a sweet voice -॥ 4॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|