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श्लोक 13.6.29  |
देवानां शरणं पुण्यं सर्वं पुण्यैरवाप्यते।
पुण्यशीलं नरं प्राप्य किं दैवं प्रकरिष्यति॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| देवताओं का आश्रय पुण्य है। पुण्य से ही सब कुछ प्राप्त होता है। पुण्यवान पुरुष को पाकर भगवान क्या करेंगे?॥29॥ |
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| The refuge of the gods is virtue. Everything is achieved by virtue. What will God do after getting a virtuous man?॥ 29॥ |
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