श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.6.29 
देवानां शरणं पुण्यं सर्वं पुण्यैरवाप्यते।
पुण्यशीलं नरं प्राप्य किं दैवं प्रकरिष्यति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
देवताओं का आश्रय पुण्य है। पुण्य से ही सब कुछ प्राप्त होता है। पुण्यवान पुरुष को पाकर भगवान क्या करेंगे?॥29॥
 
The refuge of the gods is virtue. Everything is achieved by virtue. What will God do after getting a virtuous man?॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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