Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.6.28: प्रबल पुरुषार्थ से पूर्व किया गया कोई भी कर्म मानो किया ही न गया हो और केवल वही प्रबल कर्म ही सम्पन्न होकर अपना फल देता है। इस प्रकार पुण्य या पाप कर्म अपना वास्तविक फल नहीं दे पाते॥28॥ | mahabharat अध्याय 13.6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रबल पुरुषार्थ से पूर्व किया गया कोई भी कर्म मानो किया ही न गया हो और केवल वही प्रबल कर्म ही सम्पन्न होकर अपना फल देता है। इस प्रकार पुण्य या पाप कर्म अपना वास्तविक फल नहीं दे पाते॥28॥
Any deed done before making strong efforts becomes as if it was not done and only that strong deed is accomplished and gives its result. In this way, virtuous or sinful deeds are not able to give their true results.॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥