Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.6.24: इस लोक में देवता भी किसी के पुण्य कर्म का अनुमोदन नहीं करते, अपितु अपनी पराजय के भय से वे पुण्यात्मा पुरुषों में भयंकर आसक्ति उत्पन्न कर देते हैं (जिससे उनके धर्माचरण में बाधा उत्पन्न हो सकती है)।॥24॥ | mahabharat अध्याय 13.6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न दैवतानि लोकेऽस्मिन् व्यापारं यान्ति कस्यचित्।
व्यासङ्गं जनयन्त्युग्रमात्माभिभवशङ्कया॥ २४॥
अनुवाद
इस लोक में देवता भी किसी के पुण्य कर्म का अनुमोदन नहीं करते, अपितु अपनी पराजय के भय से वे पुण्यात्मा पुरुषों में भयंकर आसक्ति उत्पन्न कर देते हैं (जिससे उनके धर्माचरण में बाधा उत्पन्न हो सकती है)।॥24॥
Even the gods do not approve of anyone's pious deeds in this world. Rather, due to the fear of their defeat, they create a fierce attachment in the virtuous men (which may create obstacles in their religious practices).॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥