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mahabharat 13.6.23: देवताओं में भी इन्द्र आदि के स्थान अनित्य देखे जाते हैं। पुण्यकर्मों के बिना देवता कैसे स्थिर रहेंगे और दूसरों को कैसे स्थिर रख सकेंगे?॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 13.6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.6.23 
यथा स्थानान्यनित्यानि दृश्यन्ते दैवतेष्वपि।
कथं कर्म विना दैवं स्थास्यति स्थापयिष्यति॥ २३॥
 
 
अनुवाद
देवताओं में भी इन्द्र आदि के स्थान अनित्य देखे जाते हैं। पुण्यकर्मों के बिना देवता कैसे स्थिर रहेंगे और दूसरों को कैसे स्थिर रख सकेंगे?॥ 23॥
 
Even among the gods, the places of Indra etc. are seen to be temporary. Without pious deeds, how will the God remain stable and how will he be able to keep others stable?॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)